5जी के बाद भारत में तैयार हो रहा है सैटेलाइट इंटरनेट, सीधे अंतरिक्ष से मिलेगी सेवा

सैटेलाइट इंटरनेट से क्या होगा फायदा?  दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में भी सैटेलाइट इंटरनेट इंटरनेट सेवा प्रदान की जा सकती है। 

इसमें यूजर्स को फाइबर और सेल टावर के मुकाबले ज्यादा आसान कनेक्टिविटी मिलती है। 

इसकी मदद से उन इलाकों में भी सेवा पहुंचाई जा सकती है जहां फाइबर और सेल टावर की सेवा नहीं पहुंची है. 

कैसे काम करेगी यह तकनीक?  बात करें यह इंटरनेट कैसे काम करता है तो इसे समझना बहुत आसान है।  

इंटरनेट सेवा प्रदाता अंतरिक्ष में उपग्रहों को इंटरनेट सिग्नल भेजते हैं, रिसीवर की मदद से उपयोगकर्ताओं तक पहुंचते हैं।    

रिसीवर या डिश एक मॉडेम से जुड़ा होता है, जो आपके कंप्यूटर या अन्य उपकरणों से जुड़ता है। 

सीधे शब्दों में कहें तो यह प्रक्रिया उसी तरह काम करती है जैसे आपके घरों में मौजूद टीवी तक सिग्नल पहुंचाई जाती है।

सैटेलाइट इंटरनेट की स्पीड कितनी होती है? शुरुआत में इस तरह के इंटरनेट कनेक्शन में आपको ज्यादा स्पीड नहीं मिलती थी, लेकिन समय के साथ इनकी स्पीड बेहतर होती जा रही है। 

Elon Musk की Satrlink सर्विस की बात करें तो यूजर्स को 50Mbps से 200Mbps स्पीड तक इंटरनेट मिलता है

हालांकि, इसमें आपको और लेटेंसी देखने को मिल सकती है।  वहीं, सैटेलाइट इंटरनेट पर भी मौसम का असर पड़ेगा। 

जिस तरह खराब मौसम में टीवी कनेक्शन लेने में दिक्कत होती है, उसी तरह सैटेलाइट इंटरनेट में भी दिक्कत हो सकती है। 

वे आपात स्थिति में बहुत मददगार होते हैं।  इसका एक बड़ा उदाहरण रूस-यूक्रेन युद्ध है।  जहां Starlink ने यूक्रेन में इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर को बचाने में काफी मदद की है।