क्या आपने देखा पीएम मोदी का ये चश्मा? जानिए इसकी खासियत

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को इंडिया मोबाइल कांग्रेस में मेटावर्स टेक्नोलॉजी वेब 3 के साथ चश्मा लगाया।

आखिर यह मेटावर्स में क्या है, हर कोई इसके बारे में क्यों बात कर रहा है और यह भविष्य में हमारी दुनिया को कैसे बदलने वाला है।

भविष्य की इस तकनीक के आने के बाद क्या हम वाकई वास्तविक और आभासी दुनिया में फर्क करना भूल जाएंगे

आइए इसके बारे में समझते हैं। मेटावर्स एक मायावी दुनिया है जहां आपकी उपस्थिति नकली होगी, लेकिन आपके कार्य वास्तविक होंगे।

ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस का अनुमान है कि 2024 तक मेटावर्स का बाजार 800 बिलियन डॉलर का हो जाएगा।

और बैंक ऑफ अमेरिका ने मेटावर्स को 14 तकनीकों में शामिल किया है जो हमारे जीवन में क्रांति लाने वाली हैं।

मेटावर्स एक तरह की वर्चुअल दुनिया है। इस तकनीक से आप वर्चुअल आइडेंटिटी के जरिए डिजिटल दुनिया में प्रवेश करते हैं।

अर्थात् तुम्हारा शरीर नहीं है, तुम्हारे स्थान पर तुम्हारा एक रूप है। यह एक अलग दुनिया है और यहां आपकी एक अलग पहचान है।

मेटावर्स ऑगमेंटेड रियलिटी, वर्चुअल रियलिटी, मशीन लर्निंग, ब्लॉकचैन टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी कई तकनीकों को मिलाकर काम करता है।

इसके लिए वर्चुअल हेडसेट की जरूरत होती है। इसके माध्यम से आप आभासी दुनिया में प्रवेश करते हैं।

इस आभासी दुनिया में हमारे और हमारे दोस्तों के पास आभासी 3डी अवतार होंगे, जिनके साथ हम मेटावर्स में कुछ भी कर सकते हैं जो हम वास्तविक दुनिया में कर सकते हैं

यहां हम अपने जीवन यापन के लिए वर्चुअल घर और जमीन खरीद सकेंगे। मेटावर्स पर हम अपने दोस्तों के साथ डिस्को का आनंद ले सकेंगे

उनके साथ खेल का आनंद ले सकेंगे, फिल्में देख सकेंगे। हालांकि, इन सब चीजों के होने के लिए हमारा VR बॉक्स होना जरूरी होगा।

मेटावर्स पोस्ट-वर्चुअल रियलिटी वर्ल्ड यानी ऑगमेंटेड रियलिटी पर आधारित है। मेटावर्स दुनिया का सबसे बड़ा बिजनेस प्लेटफॉर्म बन जाएगा।

विभिन्न संसाधनों और कंपनियों की मदद से इन्हें बनाने में कई साल लग सकते हैं।