आचार्य चाणक्य ने बताया है कि सत्य ही ईश्वर है, सत्य से बढ़कर कुछ नहीं

एक सच्चा गुरु अपने शिष्यों को हर परिस्थिति में सही रास्ता दिखाने का काम करता है। आचार्य चाणक्य उन शिक्षकों में से एक थे।

जिन्होंने अपनी नीतियों के माध्यम से लाखों दिशाहीन शिष्यों को सही मार्ग दिखाने का कार्य किया।

आचार्य चाणक्य द्वारा रचित चाणक्य नीति बताती है कि जीवन में हर विपरीत परिस्थिति से कैसे लड़ना है।

आचार्य चाणक्य न केवल राजनीति, कूटनीति, युद्ध में पारंगत थे, बल्कि उन्हें जीवन के हर क्षेत्र का विस्तृत ज्ञान था।

उन्होंने व्यक्ति के व्यवहार को अच्छी तरह से समझा और उससे संबंधित कई नीतियां बनाईं।

चाणक्य नीति के इस श्लोक में बताया गया है कि सत्य इस संसार में ईश्वर का रूप है। धर्म का मूल स्तंभ भी सत्य पर निर्भर है।

सत्य ही सबका मूल है और सत्य से बढ़कर इस संसार में कुछ भी नहीं है। इसलिए सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए और सदा सत्य को ही अपना परम धर्म मानना ​​चाहिए।

चाणक्य नीति के अनुसार हमेशा सच बोलना चाहिए, लेकिन ऐसा सच नहीं बोलना चाहिए जो अप्रिय हो।

इसी के साथ कभी भी ऐसा असत्य नहीं बोलना चाहिए जो उसे प्रिय हो. यही सनातन धर्म है।

इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य बता रहे हैं कि हमेशा सत्य के मार्ग पर चलना चाहिए।

लेकिन ऐसा सच नहीं बोलना चाहिए जिससे दूसरों का दिल दुखता हो। जैसे उनके रहन-सहन पर कटाक्ष हो या उनकी भाषा का उपहास या आपके दृष्टिकोण से जो सत्य हो

लेकिन यदि वह बात सुनने वाले के प्रति असम्मानजनक हो तो उसे मुँह से नहीं निकालना चाहिए।