इस तोप से सुरक्षित रहेंगे मुकेश अंबानी, हर मिनट चलाती हैं 800 गोलियां

मुकेश अंबानी को हाल ही में जेड प्लस सुरक्षा मिली है। उनके काफिले में कुल 58 सुरक्षाकर्मी और पांच या अधिक बुलेटप्रूफ वाहन रहेंगे।

इस तोप को पहली बार 1960 में बनाया गया था। 1966 से लगातार इस्तेमाल में है।

दुनिया के 70 से ज्यादा देशों में सुरक्षाकर्मी इसे चला रहे हैं। पूरी दुनिया में इस सब-मशीन गन के 100 से अधिक वेरिएंट और क्लोन हैं।

इस गन की सबसे खास बात इसकी फायरिंग रेट है। यानी यह एक मिनट में 800 गोलियां दागती है। यानी सामने वाला बुरी मौत मरेगा।

हेकलर एंड कोच एमपी5 सब-मशीन गन का वजन 2.54 किलोग्राम है। लंबाई 27 इंच और बैरल की लंबाई 8.9 इंच है।

यह मशीन गन तीन तरह की गोलियां दागती है - 9x19mm Parabellum, 10mm Auto और .40S&W।

इससे निकलने वाली गोलियां 400 मीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से दुश्मन की तरफ जाती हैं। यानी ढाई सेकेंड में एक किलोमीटर दूर बैठे रहने की मौत तय है।

हेकलर एंड कोच एमपी5 सब-मशीन गन की सटीक रेंज 200 मीटर है। इसमें पाँच प्रकार की पत्रिकाएँ हैं

15, 30, 40 और 50 राउंड की डिटेचेबल बॉक्स मैगजीन और 100 राउंड की बीटा सी मैग ड्रम मैगजीन। इस गन पर लोहे की साइट्स लगाकर दूर तक देखा जा सकता है।

Heckler & Koch MP5 सब-मशीन गन की सबसे खास बात यह है कि यह बेहद हल्की है।

यानी ज्यादा देर तक फायरिंग की जा सकती है. बन्दूक में फंसने की कोई समस्या नहीं है।

भारत में इस बंदूक का इस्तेमाल भारतीय सेना, मार्कोस, राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड, फोर्स वन, मिजोरम पुलिस, एसपीजी और दिल्ली की महिला सामरिक इकाई द्वारा किया जाता है।

Heckler & Koch MP5 सब-मशीन गन दुनिया में कई जगहों पर बनाई जाती है। चीन इस बंदूक की सबसे ज्यादा नकल करता है

वह बिना लाइसेंस के इस बंदूक की कॉपी बनाता है। फ्रांस, ग्रीस, ईरान, लक्जमबर्ग, मैक्सिको, पाकिस्तान, सऊदी अरब, सूडान, स्विट्जरलैंड, तुर्की और इंग्लैंड लाइसेंस के तहत इसका निर्माण करते हैं।

हेकलर एंड कोच एमपी5 सब-मशीन गन का निर्माण भारत में आयुध निर्माणी में नए नाम से किया जाता है।