OLED vs AMOLED vs POLED Display: स्मार्टफोन के अलग-अलग डिस्प्ले का क्या है मतलब, नया मोबाइल खरीदने से पहले काम आएगी ये जानकारी

जब आप स्मार्टफोन खरीदने जाते हैं तो उसके स्पेशिफिकेशंस के जरिए अपने लिए बेहतर मॉडल का चयन करते हैं. 

स्क्रीन साइज, बैट्री बैकअप, ऑपरेटिंग सिस्टम, रैम साइज, कैमरे की क्वालिटी इत्यादि के आधार पर आप अपने लिए स्मार्टफोन चुनते हैं 

पहले सभी स्मार्टफोन की डिस्प्ले टेक्नोलॉजी समान थी लेकिन कुछ समय से अब  डिस्प्ले भी महत्वपूर्ण हो गया है और इसमें OLED, AMOLED और POLED जैसे  विकल्प आ गए हैं 

मोबाइल फोन या स्मार्टफोन अब धीरे-धीरे बेसिक जरूरत बन गए हैं और इसके जरिए कई जरूरी काम निपटाए जाते हैं. 

ऐसे में यह जरूरी हो गया है कि डिस्प्ले के जितने विकल्प बाजार में उपलब्ध  हैं, उनकी खासियतों और खामियों को समझ लें ताकि अपने बजट में बेस्ट ऑप्शन  चुनने में आसानी हो. 

OLED का मतलब ऑर्गेनिक लाइट एमिटिंग डायोड है. यह ऐसी डिस्प्ले टेक्नोलॉजी  है जिसमें एलईडी ऑर्गेनिक मैटेरियल का होता है और जब इसमें करेंट गुजरती है  तो यह लाइट उत्सर्जित करता है. 

इसका इस्तेमाल वाइब्रेंट कलर को डिस्प्ले करने के लिए किया जाता है यानी कि इसमें एलईडी के मुकाबले अधिक चमक होती है. 

– लाइट उत्सर्जित करने वाले लेयर के चलते यह बहुत हल्का होता है और फ्लेक्सिबल होता है. – इसमें एलसीडी की तरह बैकलाइट की जरूरत नहीं होती है.

– इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है. – इसमें करीब 170 डिग्री के एंगल तक का व्यू देख सकते हैं.

– हालांकि इसकी लाइफ एलसीडी और एलईडी डिस्प्ले टेक्नोलॉजी के मुकाबले कम होती है. – इसके कलर बैलेंस में काफी वैरिएशन होता है. – यह पानी से खराब हो सकता है यानी यह वॉटर रेजिस्टेंट नहीं है.