Real Estate vs Mutual Fund: रियल एस्टेट या म्यूचुअल फंड, निवेश के लिए क्या है बेहतर विकल्प?

निवेश से पहले कई बातों पर विचार करना पड़ता है और फिर उसके बाद निवेशक अपने हिसाब से लिस्ट बनाते हैं कि पैसे कहां लगाए जाएं 

लांग टर्म की बात करें तो कुछ निवेशक रीयल एस्टेट में पैसे लगाते हैं तो कुछ म्यूचुअल फंड में पैसे लगाना पसंद करते हैं. 

निवेश की शुरुआत करने से पहले निवेशकों के मन में इस बात को लेकर उलझन  रहती है कि रीयल एस्टेट में पैसे लगाना बेहतर है या म्यूचुअल फंड्स. 

दोनों में से आपके लिए बेहतर कौन है, इसका फैसला इनकी तुलना करके लिया जा सकता है. 

रीयल एस्टेट के साथ एक दिक्कत कानूनी पेच का आता है. अगर किसी प्रॉपर्टी के  साथ कोई कानूनी दिक्कत आ गई तो यह मामला लंबे समय तक खिंच सकता है.  

इससे प्रॉपर्टी की वैल्यू भी कम होती है और हो सकता है कि आपका पैसा लंबे समय तक फंसा रहे.  

वहीं दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड को सेबी रेगुलेट करती है जिसके चलते इसमें कानूनी दिक्कतें आने की आशंका बहुत ही कम होती है. 

अगर आपने साझेदारी में कोई प्रॉपर्टी खरीदा है या किसी दूर-दराज के इलाके  में प्रॉपर्टी खरीदा है तो इसकी निगरानी काफी मुश्किल भरा होता है 

वहीं दूसरी तरफ म्यूचुअल फंड में निवेश को ऑनलाइन जब चाहे ट्रैक कर सकते  हैं कि आपका पैसा आपके लक्ष्य के हिसाब से बढ़ रहा है या नहीं. 

रीयल एस्टेट में निवेश के लिए ढेर सारे पैसे की जरूरत होती है जबकि म्यूचुअल फंड में छोटी सी राशि से भी शुरुआत की जा सकती है. 

म्यूचुअल फंड में महज 500 रुपये में भी एसआईपी शुरू कर सकते हैं जो हर  महीने आपके बैंक खाते से अपने आप कटता जाएगा और कुछ समय बाद आपके पास  अच्छी-खासी पूंजी तैयार हो जाएगी. 

रीयल एस्टेट और म्यूचुअल फंड, दोनों में निवेश पर टैक्स बेनेफिट्स हासिल कर सकते हैं. 

कुछ म्यूचुअल फंड्स में सेक्शन 80सी के तहत 1.5 लाख रुपये तक की जमा पर टैक्स बेनेफिट्स हासिल कर सकते हैं.