आपको लगता है कि भारत में महंगाई ज्यादा है? कम से कम 100 देश हमसे खराब हालत में हैं

जनवरी 2022 से भारत की मुद्रास्फीति दर 6 प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है.  वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य में होने वाली स्थाई व अस्थाई वृद्धि को  ‘मुद्रास्फीति’ कहा जाता है 

खाद्य तेलों से लेकर खाद्य पदार्थों और ईंधन तक, लगभग सभी उपभोक्ता वस्तुएं पहले की तुलना में महंगी हो गई हैं 

लेकिन डेटा से पता चलता है कि एक औसत भारतीय मंहगाई की जिस दर से परेशान  है, वह उसके आस-पास भी नहीं है जिसे 100 से ज्यादा देशों के लोग इस समय झेल  रहे हैं. 

दुनिया भर की सरकारों द्वारा जारी मुद्रास्फीति के आंकड़ों के आधार पर ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स डॉट कॉम– एक डेटा रिपोजिटरी वेबसाइट- ने अपनी रिपोर्ट तैयार की है.  

उनके द्वारा एकत्रित मुद्रास्फीति के आंकड़ों के अनुसार, भारत अपनी 7.04  प्रतिशत मुद्रास्फीति दर (मई 2022 में रिपोर्ट) के साथ, कुल 172 देशों में  108 वें स्थान पर रहा.  

29 जून तक के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 172 देशों में से 63 में मुद्रास्फीति की दर 10 प्रतिशत से अधिक थी.  

ट्रेडिंग इकोनॉमिक्स के अनुसार, चार देशों में मुद्रास्फीति की दर 100 प्रतिशत से ऊपर थी. 

सीधे शब्दों में कहें, तो इन देशों में लोग पिछले साल की तुलना में एक ही उत्पाद के लिए औसतन दोगुना पैसा खर्च कर रहे थे. 

मौजूदा समय में लेबनान दुनिया में सबसे उच्च मुद्रास्फीति दर का सामना कर  रहा है. इस छोटे पश्चिम एशियाई देश में औसतन उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों  में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है  

उपभोक्ता वस्तुओं के लिए पिछले साल मई में किए जा रहे औसतन भुगतान की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक भुगतान कर रहे हैं.