चाणक्य नीति : 'कमजोर दिमाग' वाले इंसान  को महत्वपूर्ण काम न सौंपें

अक्सर देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति को सफलता मिल जाती है तो वह अपने बारे में सभी को बड़े गर्व और अहंकार के साथ बताता है

तो वहीं दूसरी ओर अगर कोई व्यक्ति किसी काम में फेल हो जाता है तो वह पूरे समाज से मुंह मोड़ने लगता है।

ऐसे में आचार्य चाणक्य का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में खुद को कमजोर नहीं करना चाहिए।

अपना मनोबल इतना मजबूत रखें कि आप किसी भी स्थिति का साहस और धैर्य से सामना कर सकें।

चाणक्य जी के अनुसार जिस व्यक्ति में कुछ करने की इच्छा होती है वह कभी भी किसी भी स्थिति से भागता नहीं है।

इतना ही नहीं जिस व्यक्ति के पास हुनर होता है वह किसी भी काम को करने से नहीं डरता बल्कि जितना हो सके मेहनत करता है।

तो आपको बता दें कि आज हम आपको इससे जुड़ी चाणक्य नीति के बारे में बताने जा रहे हैं

जिसके अनुसार लोगों को जिम्मेदारी का काम सौंपना फायदेमंद साबित होता है।

कनेर का पेड़ अंदर से खोखला होता है। इससे ठोस मूसली नहीं बन सकती। इसी तरह कमजोर दिमाग वाले व्यक्ति को कोई ठोस काम नहीं सौंपा जा सकता।

जुगनू में चमक होती है लेकिन आग नहीं होती। इसी तरह कोई कमजोर व्यक्ति अपनी वीरता का कितना ही घमण्ड करे, उससे कोई महत्वपूर्ण कार्य नहीं लिया जा सकता।