चाणक्य नीति: बुरे समय में क्या करें, जानिए आचार्य चाणक्य ने क्या कहा

जब किसी व्यक्ति के जीवन में अच्छा समय आता है, तो व्यक्ति नहीं चाहता कि वह समय जल्दी समाप्त हो।

वहीं जब बुरा वक्त आता है तो इंसान को लगने लगता है कि यह वक्त कब खत्म होगा।

लेकिन यह सच है कि अगर जीवन में अच्छा समय आया है तो बुरा समय जरूर आएगा।

लेकिन अक्सर बुरे समय में व्यक्ति अपनी सोचने की शक्ति खो देता है और यह मान लेता है कि उसके जीवन में कुछ भी अच्छा नहीं होगा। लेकिन क्या ऐसा सोचना ठीक है?

जब बुरा वक्त आता है तो इंसान डर जाता है, घबराने लगता है। इसलिए घबराएं नहीं बल्कि शांत और स्थिर दिमाग से उस समस्या का कारण खोजें।

और फिर उसका समाधान खोजने का प्रयास करें। क्योंकि समस्या का कारण जाने बिना आप उसका समाधान नहीं खोज सकते।

जब तक हमारे जीवन में कोई कठिनाई और परेशानी न हो, हम जीवन को आराम से जीते हैं

लेकिन मुसीबतों और बुरे वक्त के बाद ही हम संघर्ष करते हैं और जीवन में आगे बढ़ते हैं। इसलिए धैर्य और आत्मविश्वास से काम लें।

चाणक्य बताते हैं कि परिस्थितियाँ और परिणाम कभी भी व्यक्ति के हाथ में नहीं होते हैं।

लेकिन उस स्थिति पर कैसे प्रतिक्रिया दें और परिणाम 100% इंसान के हाथ में होता है

इसलिए जो व्यक्ति अपनी प्रतिक्रिया को संभाल सकता है वह जीवन की सबसे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी सफलता का रास्ता खोज सकता है।

चाणक्य कहते हैं कि अच्छा समय और बुरा समय एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। इसलिए बुरे समय में भी जीवन को बेहतर बनाने के अवसरों की तलाश करें।

बुरे वक्त को देखकर हिम्मत न हारें और उस स्थिति से निकलने के लिए लगातार प्रयास करते रहें।